Friday, 5 February 2016








साईंबाबा
भारतीय समाज में संतऋषि- मुनियोंफकीरों ने अहम भूमिका निभाई है। इनमें से अधिकतर संतों ने लोक- आस्था के आधार पर भगवान का दर्जा पाया है। इन्हीं प्रमुख संतों में से एक शिरडी के साईं बाबा थेजो आध्यात्मिक गुरुयोगीफकीर तथा भगवान के रूप में भी प्रसिद्ध है। साईं बाबा को हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग पूजनीय मानते हैं। साईं बाबा ने अपने जीवन में मानवता को ही अपना धर्म माना था। साईं बाबा को लोग कई नामों से जानते हैं। इन नामों में से कुछ प्रमुख नाम निम्न हैं:साईंबाबा के 108 नाम 
1.साईंनाथ: प्रभु साई
2.लक्ष्मी नारायण: लक्ष्मी नारायण के चमत्कारी शक्ति वाले
3.कृष्णमशिवमारूतयादिरूप: भगवान कृष्णशिवराम तथा अंजनेय का स्वरूप
4.शेषशायिने: आदि शेष पर सोने वाला
5.गोदावीरतटीशीलाधीवासी: गोदावरी के तट पर रहने वाले (सिरडी)
6.भक्तह्रदालय: भक्तों के दिल में वास करने वाले
7.सर्वह्रन्निलय: सबके मन में रहने वाले
8.भूतावासा: सभी प्राणियों में रहने वाले
9.भूतभविष्यदुभवाज्रित: भूतभविष्य व वर्तमान का ज्ञान देने वाले
10.कालातीताय: समय से परे
11.काल: समय
12.कालकाल: मृत्यु के देवता का हत्यारा
13.कालदर्पदमन: मृत्यु का भय दूर करने वाले
14.मृत्युंजय: मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले
15.अमत्य्र: श्रेष्ठ मानव
16.मर्त्याभयप्रद: मनुष्य को मुक्ति देने वाले
17.जिवाधारा: जीवन का समर्थन करने वाले
18.सर्वाधारा: समस्त क्रिया का समर्थन करने वाले
19.भक्तावनसमर्थ: पूजनीय
20.भक्तावनप्रतिज्ञाय: अपने भक्तों की रक्षा का वचन निभाने वाले
21.अन्नवसत्रदाय: वस्त्र व अन्न देने वाले
22.आरोग्यक्षेमदाय: स्वास्थ्य और आराम देने वाले
23.धनमाङ्गल्यप्रदाय: भलाई और स्वास्थ्य का अनुदान करने वाले
24.ऋद्धिसिद्धिदाय: बुद्धि और शक्ति देने वाले
25.पुत्रमित्रकलत्रबन्धुदाय: पुत्रमित्र आदि का सुख देने वाले
26.योगक्षेमवहाय: मानुष्य की रक्षा करने वाले
27.आपदबान्धवाय: समस्या के समय भक्तों के साथ रहने वाले
28.मार्गबन्धवे: जीवन का मार्ग- दर्शन करने वाले
29.भक्तिमुक्तिस्वर्गापवर्गदाय: धनअनन्त परमानंद और अनन्त राज्य (स्वर्ग) देने वाले
30.प्रिय: भक्तों के प्रिय
31.प्रीतिवर्द्धनाय: भगवान के प्रति भक्ति बढ़ाने वाले
32.अन्तर्यामी: पवित्र आत्मा
33.सच्चिदात्मने: ईश्वरीय सत्य
34.नित्यानन्द: हमेशा शाश्वत आनंद में डूबे रहने वाले
35.परमसुखदाय: असीम सुख
36.परमेश्वर: प्रमुख देव
37.परब्रह्म: परम ब्रह्म
38.परमात्मा: दिव्य आत्मा
39.ज्ञानस्वरूपी: बुद्धिमान व्यक्ति
40.जगतपिता: ब्रह्मांड के पिता
41.भक्तानां मातृ दातृ पितामहाय : सभी भक्तों के लिए
42.भक्ताभयप्रदाय: सभी भक्तों को शरण में लेने वाले
43.भक्तपराधीनाय: अपने भक्तों का सारंक्षण करने वाले
44.भक्तानुग्रहकातराय: अपने भक्तों को आशीर्वाद देने वाले
45.शरणागतवत्सलाय: भक्तों को शरण में लेने वाले
46.भक्तिशक्तिप्रदाय: अपने भक्तों को ताकत देने वाले
47.ज्ञानवैराग्यप्रदाय: बुद्धि और त्याग करने वाले
48.प्रेमप्रदाय: अपने सभी भक्तों पर प्रेम की नि: स्वार्थ वर्षा
49.संशयह्रदय दौर्बल्यपापकर्म वासनाक्षयकराय:पाप और प्रवृत्ति की कमजोरियों को दूर करने वाले
50.ह्रदयग्रन्थिभेदकाय: दिल के अनुलग्नक नष्ट कर देने वाले
51.कर्मध्वंसिने: पापों व बुराई नष्ट करने वाले
52.शुद्ध-सत्वस्थिताय: शुद्धसच्चाई और अच्छाई
53.गुनातीतगुणात्मने: सभी अच्छे गुणों को पास रखने वाले
54.अनन्तकल्याण गुणाय: असीम अच्छे गुण वाले
55.अमितपराक्रमाय: अथाह शौर्य के स्वामी
56.जयिने: अजय
57.दुर्धर्षाक्षोभ्याय: अपने भक्तों के सभी आपदाओं को नष्ट करने वाले
58.अपराजिताय: सदैव वियजी रहने वाले
59.त्रिलोकेषु अविघातगतये: स्वतंत्रा देने वाले
60.अशक्य-रहीताय: सब कुछ पूरी तरह निष्पादित करने वाले
61.सर्वशक्तिमूर्तये: सभी शक्तियों की मूर्ति
62.सुरूपसुन्दराय: सुंदर
63.सुलोचनाय: आकर्षक सुंदर और प्रभावशाली आंखें
64.बहुरूप विश्वमूर्तये: अनेक रूप वाले
65.अरूपाव्यक्ताय: अमूर्त
66.अचिन्त्याय: सोचा से परे
67.सूक्ष्माय: छोटा रूप
68.सर्वान्तर्यामिणे: सम्पूर्ण विश्व
69.मनोवागतीताय: शब्द व दुनिया से परे
70.प्रेममूर्तये: प्यार का अवतार
71.सुलभदुर्लभाय: जिसको पाना आसान भी और कठिन
72.असहायसहायाय: भक्तों की आस्था पर निर्भर रहने वाले
73.अनाथनाथदीनबंधवे: अनाथों के दयालु प्रभु
74.सर्वभारभृते: अपने भक्तों की रक्षा का बोझ उठाने वाले
75.अकर्मानेककर्मसुकर्मिणे: महसूस न होने वाले
76.पुण्यश्रवणकीर्तनाय: सुनने योग्य
77.तीर्थाय: पवित्र नदियों का स्वरूप
78.वासुदेव: कृष्णा का स्वरूप
79.सतां गतये: सबको शरण में रखने वाले
80.सत्परायण: अच्छे गुण वाले
81.लोकनाथाय: विश्व के स्वामी
82.पावनानघाय: पवित्र रूप
83.अमृतांशवे: दिव्य अमृत
84.भास्करप्रभाय: सूर्य की तरह चमकने वाले
85.ब्रह्मचर्यतपश्चर्यादिसुव्रताय: ब्रह्मचारी की तपस्या के अनुसार
86.सत्यधर्मपरायणाय: सत्य और धर्म का प्रतीक
87.सिद्धेश्वराय: समस्त आठ सिद्धि के स्वामी
88.सिद्धसंकल्पाय: पूर्ण रूप से इच्छा का सम्मान करने वाले
89.योगेश्वराय: सभी योगियों या संन्यासियों के मस्तक के समान
90.भगवते: ब्रह्मांड की प्रमुख प्रभु
91.भक्तवत्सलाय: अपने भक्तों के पराधीन
92.सत्पुरुषाय: अनन्तअव्यक्त व उत्तम पुरुष
93.पुरुषोत्तमाय: उच्चतम
94.सत्यतत्वबोधकाय: सत्य और वास्तविकता की सही सिद्धांतों का उपदेश देने वाले
95.कामादिशड्वैरिध्वंसिने: इच्छाक्रोधलोभघृणाशानऔर वासना का नाश करने वाले
96.समसर्वमतसम्मताय: सहिष्णु और सभी के प्रति समान
97.दक्षिणामूर्तये: भगवान शिव
98.वेंकटेशरमणाय: भगवान विष्णु
99.अद्भूतानन्तचर्याय: अनंतअद्भुत कर्म (चमत्कार) करने वाले
100.प्रपन्नार्तिहराय: समस्याओं का नाश करने वाले
101.संसारसर्वदु: ख़क्षयकराय: सभी दुखों का नाश करने वाले
102.सर्ववित्सर्वतोमुखाय:
103.सर्वान्तर्बहि: स्थिताय: सभी मनुष्य में मौजूद रहने वाले
104.सर्वमंगलकराय: भक्तों के कल्याण के शुभ करने वाले
105.सर्वाभीष्टप्रदाय: भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति करने वाले
106.समरससन्मार्गस्थापनाय: एकता का संदेश देने वाले
107.समर्थसद्गुरुसाईनाथाय: श्री सद्गुरु साईंनाथ


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